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मंगलवार, 22 जनवरी 2013

शिव पार्वती संवाद

कथाकारो द्वारा जितनी भी कथाये सुनाई जाती है
क्या हम जानते है
विश्व के सर्वश्रेष्ठ और सर्वप्रथम कथाकार कौन थे ?
विश्व के सर्वप्रथम कथाकार भगवान शिव
और श्रोता माता पार्वती थी
प्रथम कथा कौनसी थी ?
प्रथम कथा रामायण थी
जो शिव पार्वती संवाद से ही प्रारम्भ होती है
कथाकार को कथा सुनाने जब आनंद आता है
जब श्रोता उसी श्रेणी और समान आनंद
अनुभव करने वाला होता है
अच्छा वक्ता होने के लिये व्यक्ति मे अच्छा श्रोता का गुण होना अनिवार्य है
व्यक्ति अच्छा लेखक हो
इसलिये उसमे अच्छे पाठक का गुण होना चाहिये
व्यक्ति मे अच्छा श्रोता और
अच्छे पाठक का गुण होने से
विषय को समझने मे अधिक समय नही लगता है
कोई भी प्रसंग या तथ्य सुनते ही व्यक्ति उसे आत्मसात कर लेता है
माता पार्वती अच्छी श्रोता थी
इसलिये भगवान शिव विषयो को अच्छी तरह समझा पाये
यह उल्लेखनीय है वर्तमान मे किसी भी व्यक्ति मे
किसी व्यक्ति की कथा या व्यथा को
सुनने का धैर्य नही है
किसी विषय की पुस्तको को पढने मे रूचि नही है
परिणामस्वरूप बहुत कुछ कहने के बाद भी
सुनने वाले को कुछ समझ मे नही आता है
पढने वाला बहुत कुछ पढ लेता है
पर विषय कुछ भी स्पष्ट नही हो पाता है
कभी -कभी यह देखने मे आता है कि उच्च श्रेणी के श्रोता होते है
उन्हे उस श्रेणी के वक्ता का वक्तव्य सुनने को नही मिलता
एक बहुत अच्छा विषय अकुशल वक्ता के वक्तव्य के कारण
अपना महत्व खो देता है
इसलिये कौनसा विषय कौनसा वक्ता बेहतर तरीके से
जन समुदाय के बीच रख सकता है
अच्छे वक्ता का चयन आयोजन हो या कथा हो
सफलता सुनिश्चित करता है
शिव पार्वती संवाद का महत्व इसलिये भी है
क्योकि दोनो के मध्य पति-पत्नि के सम्बन्ध है
वर्तमान युग मे जिन पति-पत्नि के बीच संवादहीनता
की स्थिति के कारण दाम्पत्य सम्बन्ध समाप्ति की और है
उन्हे शिव -पार्वती से संदेश ग्रहण करना चाहिये कि
भिन्न -भिन्न परिवेश पारिवारिक सामाजिक प्रष्ठभूमियो के होने
के बावजूद वे किस प्रकार अध्यात्मिक स्तर पर संवाद स्थापित कर
किस प्रकार आपसी समझ विकसित करते है
तभी तो कहा जाता है शक्ति के बिना शिव शव है